3 एकड़ खेत में धान की फसल उगाने के बाद बिचौलियों को कम भाव में धान बेचना पड़ता था। खाद-बीज के लिए साहूकार से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेना मजबूरी थी।
नरेश ऑनलाइन सेंटर से टोकन कटवाकर 63 क्विंटल धान ₹3,100/क्विंटल की दर से बेचा। PM किसान की ₹6,000 वार्षिक राशि सीधे बैंक खाते में प्राप्त हुई।
धान की अंतर राशि एकमुश्त ₹58,000 मिलने से सारा पुराना कर्ज़ चुकता हुआ। अगली फसल के लिए उन्नत बीज खरीदा और बेटी की कॉलेज फीस समय पर जमा की।
गृहणी होने के कारण छोटी-मोटी घरेलू आवश्यकताओं, बच्चों की दवाई या कॉपी-किताब के लिए पति की दैनिक मजदूरी पर पूर्ण रूप से निर्भर रहना पड़ता था।
नरेश ऑनलाइन सेंटर से आधार लिंक बैंक खाते का e-KYC व फॉर्म सबमिट हुआ। प्रति माह ₹1,000 सीधे बैंक खाते में DBT के माध्यम से लगातार मिल रहे हैं।
आर्थिक स्वावलंबन आया। हर महीने मिलने वाले पैसों से स्व-सहायता समूह में ₹200 बचत करती हैं और बच्चों की पढ़ाई व पोषण में किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता।
कच्चे खपरैल के मकान में रहते थे। हर बरसात में छत से पानी टपकता था और मिट्टी की दीवारें ढहने का खतरा रहता था। आर्थिक स्थिति पक्का घर बनाने की नहीं थी।
PM आवास ग्रामीण सूची में नाम आने पर ₹1,20,000 की सरकारी सहायता 3 किस्तों में मिली + ₹12,000 शौचालय निर्माण सहायता स्वच्छ भारत मिशन से स्वीकृत हुई।
आज परिवार दो कमरों के मजबूत पक्के मकान में सुरक्षित रहता है। बरसात में किसी भय की आवश्यकता नहीं। बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई में बड़ा सुधार हुआ है।
हृदय रोग एवं पथरी की गंभीर समस्या थी। निजी अस्पताल ने ऑपरेशन के लिए ₹1,40,000 का खर्च बताया था, जो गरीब परिवार के सामर्थ्य से बाहर था।
नरेश ऑनलाइन सेंटर पर आकर राशन कार्ड से 15 मिनट में आयुष्मान कार्ड डाउनलोड कराया। बिलासपुर के अधिकृत निजी अस्पताल में ऑपरेशन पूर्णतः निःशुल्क हुआ।
बिना एक रुपया खर्च किए सफल ऑपरेशन हुआ। दवाईयां भी कार्ड से मुफ्त मिलीं। परिवार कर्जदार होने से बच गया और आज सुखदेव जी पूरी तरह स्वस्थ हैं।
ITI वेल्डर पास करने के बाद मजदूरी पर काम करते थे। स्वयं की वेल्डिंग व फैब्रिकेशन वर्कशॉप खोलने के लिए मशीनरी खरीदने हेतु पूंजी नहीं थी।
नरेश ऑनलाइन सेंटर पर प्रोजेक्ट रिपोर्ट व उद्यम पंजीयन तैयार करवाकर बैंक में मुद्रा लोन आवेदन जमा किया। बिना किसी गारंटी के ₹3,50,000 का ऋण मंजूर हुआ।
बिलाईगढ़ में 'सिदार वेल्डिंग वर्क्स' की स्थापना की। आज महीने की शुद्ध आमदनी ₹30,000-₹40,000 है और उन्होंने 2 स्थानीय ग्रामीण युवकों को रोजगार भी दिया है।
खेत बिजली लाइन से 1 किलोमीटर दूर था। डीजल पम्प से सिंचाई करने में प्रति एकड़ ₹6,000 का ईंधन खर्च होता था जिससे रबी फसल लगाना घाटे का सौदा था।
क्रेडा (CREDA) के अंतर्गत सौर सुजला योजना में आवेदन किया। मात्र ₹15,000 के किसान अंशदान पर 3HP का आधुनिक सोलर सिंचाई पम्प खेत में स्थापित हुआ।
डीजल का खर्च शून्य हुआ। अब साल में 3 फसलें (धान, चना, साग-सब्जी) ले रहे हैं। सालाना कृषि आय ₹1.2 लाख से बढ़कर ₹2.4 लाख हो गई।
स्व-सहायता समूह केवल छोटी-मोटी बचत तक सीमित था। महिलाओं के पास कोई उच्च तकनीकी रोजगार या स्वतंत्र आय का साधन नहीं था।
नमो ड्रोन दीदी योजना में चयन हुआ। 15 दिन का निःशुल्क पायलट प्रशिक्षण मिला और समूह को 80% सरकारी सब्सिडी पर कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया गया।
अब वे क्षेत्र के किसानों के खेतों में नैनो यूरिया व कीटनाशक छिड़काव करती हैं (प्रति एकड़ ₹300)। सीजन में समूह प्रति माह ₹50,000 से अधिक कमा रहा है।
12वीं में 84% अंक प्राप्त करने के बाद भी नर्सिंग कॉलेज की वार्षिक फीस ₹45,000 भरने में मजदूर माता-पिता असमर्थ थे। पढ़ाई छूटने की नौबत थी।
नरेश ऑनलाइन सेंटर पर NSP OTR और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन पूर्ण कराया। सरकार से प्रति वर्ष ₹38,000 की छात्रवृत्ति सीधे खाते में स्वीकृत हुई।
बिना किसी वित्तीय अड़चन के B.Sc नर्सिंग की पढ़ाई पूरी कर रही हैं। गाँव की अन्य बालिकाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।